जब डॉक्टर ने बताया कि मेरा ब्रेस्ट निकालना पड़ेगा तब मेरी आंखों में आंसू आ गए: ताहिरा कश्यप

जब डॉक्टर ने बताया कि मेरा ब्रेस्ट निकालना पड़ेगा तब मेरी आंखों में आंसू आ गए: ताहिरा कश्यप

 

जब डॉक्टर ने बताया कि मेरा ब्रेस्ट निकालना पड़ेगा तब मेरी आंखों में आंसू आ गए: ताहिरा कश्यप

 

 

कैंसर से जंग लडऩे वाली शख्सियतों में बॉलिवुड के शानदार ऐक्टर आयुष्मान खुराना की पत्नी ताहिरा कश्यप भी शामिल हैं। आमतौर पर जहां लोग इस मर्ज को छिपाने की कोशिश करते हैं, ताहिरा ने खुद सोशल मीडिया पर अपनी कैंसर सर्जरी से लेकर बाल्ड लुक तक वाली तस्वीरें शेयर कीं।

आप जिस तरह मुस्कुराते हुए कैंसर से लड़कर विजेता बनी हैं, वह सभी के लिए बेहद प्रेरणादायी है। इतनी हिम्मत कहां से मिली?

(हंसते हुए) अगर खुदा न खास्ता, यह मेरे साथ तीन-चार साल पहले हुआ होता तो मैं ऐसी हिम्मत न दिखा पाती। मैं भी कहती होती कि मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ, नेगेटिव बातें सोचती, लेकिन मैं बुद्धिज़म फॉलो करती हूं और उससे मुझे इतनी ज्यादा ताकत मिलती है कि मुझे हिम्मत दिखाने के लिए अलग से कोशिश नहीं करनी पड़ी। मैं अंदर से यह हिम्मत महसूस करती हूं कि मैं इसे हरा सकती हूं। मुझे ऐसा लगता है कि मेरी राह में यह बाधा आई है, ताकि मैं इसे हराकर अपना बेहतर वर्जन बन सकूं।

वैसे, ऐसा सोच पाना आसान नहीं होता। जब आपको इसके बारे में पता चला तो पहला रिऐक्शन क्या था? कभी कोई कठिन पल भी आया तो आपने उसका सामना कैसे किया?

जिस दिन पता चला, तब पहले तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ। मैं हंसे जा रही थी। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि यह कैसे हो गया। आप कभी ऐसी चीज होने की उम्मीद नहीं करते हैं। मेरे पति शॉक में थे, लेकिन ऐसा एक भी पल नहीं था, जब मैं रोई हूं। मेरा सोचना था कि ठीक है, यह मुश्किल आई है तो हम इससे निबटेंगे। बस एक बार ऐसा हुआ, जब डॉक्टर ने बताया कि मेरा ब्रेस्ट निकालना पड़ेगा, जिसे वह मेरी पीठ के टिश्यूज से दोबारा कंस्ट्रक्ट कर देंगे, तब मेरी आंखों में आंसू आ गए, लेकिन मेरे पति ने कहा कि पागल हो? जब कैंसर का पता चला तब तो हंस रही थी, अब जब उसे निकाल रहे हैं तो रो रही हो। तब मुझे भी लगा कि हां, इसमें रोने की क्या बात है। बस यही एक पल था, जब मैं थोड़ी कमजोर पड़ी थी, लेकिन एक पार्टनर के तौर पर आयुष्मान बहुत ज्यादा सपॉर्टिव थे। अगर उस वक्त उन्होंने यह बात न कही होती तो शायद मैं भी दुखी फील करती। ऐसे में आपको अपने परिवार से बहुत सपॉर्ट चाहिए होता है। इसलिए, मैंने इस बारे में सोशल मीडिया में लिखा, क्योंकि मैं बताना चाहती थी कि जितने कपल हैं, पति हैं, उन्हें सपॉर्टिव होना चाहिए।

सोशल मीडिया पर इस बारे में लिखना भी एक बड़ी बात है, क्योंकि आमतौर पर लोग इसे छिपाने की ही कोशिश करते हैं!

मुझे डॉक्टर ने बताया कि काफी औरतें मैमोग्राम्स के लिए आती ही नहीं हैं। अगर किसी को कैंसर हो जाए तो काफी औरतें दुनिया से छुप जाती हैं, जॉब्स छोड़ देती हैं, जीना ही छोड़ देती हैं, पर क्यों? मैंने इस दौरान कभी छुट्टी नहीं ली। मैं रोज ऑफिस जाती थी, काम करती थी। औरतों को यह नहीं सोचना चाहिए कि यह हो गया तो जिंदगी खत्म हो गई। इसीलिए मुझे लगा कि मुझे इस पर बात करनी है, मुझे ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरुक करना है, मुझे यह मेसेज देना है कि खुद से प्यार करो। बाल हो या न हों आपको खुद से प्यार होना चाहिए। यह थोड़ा अजीब है, लेकिन मुझे अपने आप से वाकई ज्यादा प्यार तब हुआ, जब मेरे बाल नहीं थे।

आपको नहीं लगता कि हमारे यहां लंबे बाल, गोरे रंग वगैरह को जिस तरह खूबसूरती का पैमाना बना दिया गया है, इस परिभाषा को बदला जाना चाहिए?

मैं तो खुद उसका उदाहरण हूं। मेरे लिए खुद लंबे बाल खूबसूरती का प्रतीक रहे हैं। मैंने हमेशा लंबे बाल रखे, मुझे उनसे बेहद लगाव था, लेकिन खुशी तब भी नहीं थी। इसीलिए लंबे या छोटे बालों से कुछ नहीं होता, यह आपकी अपनी एक्सेप्टेंस पर है। जब मेरे बाल लंबे थे, तब मैं आज के मुकाबले कहीं ज्यादा कॉम्प्लेक्स इंसान थी। जब यह गुगली मेरी तरफ आई और मुझे बाल कटाने पड़े, तो मैं अंदर से बहुत सुंदर महसूस कर रही थी। पता नहीं क्यों, पर मैं बहुत खुश थी। जब मुझे वजह नहीं समझ आती, तो मैं इसका श्रेय बुद्धिज़म को देती हूं, क्योंकि चार साल पहले अगर मेरे सिर पर बाल न होते, तो मैं अपने घर से बाहर तक न निकलती।

आपकी फिल्म मार्च में शुरू होनी थी। वह किस स्टेज पर है? उसका आइडिया कहां से आया?

हम अभी प्री-प्रॉडक्शन स्टेज पर हैं। फिल्म थोड़ी आगे बढ़ गई है, लेकिन हम कोशिश में लगे हुए हैं। मूवी बनाना किसी जादू से कम नहीं होता। इतने सारे लोग साथ आते हैं, एक भी चीज यहां से वहां हो जाए तो पूरे प्रॉजेक्ट पर असर पड़ता है। इसका आइडिया मेरी खुद की जिंदगी से आया है। कुछ तो मेरी असल जिंदगी के पन्ने हैं तो कुछ मेरी कल्पना है, लेकिन माधुरी दीक्षित की कास्टिंग वाली बात अभी सिर्फ अफवाह है। फिल्म की कास्टिंग फाइनल नहीं हुई है।

आयुष्मान के लिए भी यह काफी चैलेंजिंग दौर था। एक तरफ जहां वे अंधाधुन और बधाई हो जैसी फिल्मों से अपने करियर के बेस्ट फेज में थे तो दूसरी तरफ आप दर्द में थीं। बच्चों को कैसे समझाया आपने?

हां, मैं उस वक्त हॉस्पिटल में थी तो निश्चित तौर पर उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन मैंने उन्हें कहा कि आप एक प्रफेशनल हैं, अब हॉस्पिटल में जो हो रहा है, वह हो रहा है। आपके होने या न होने से कुछ बदल नहीं जाएगा। इससे बढिय़ा है कि अपना काम करते रहो। वे सुबह फिल्म प्रमोट करते थे, फिर रात में हॉस्पिटल में रहते थे, यह उनके लिए बहुत मुश्किल था। इसके लिए उन्हें दाद देनी चाहिए, लेकिन मैंने भी कभी हिम्मत नहीं छोड़ी। मैं सबको यही कहती कि मैं ठीक हूं और मैं ठीक हो जाऊंगी। बच्चों को भी मैंने बताया कि मम्मा एक प्रॉब्लम से गुजर रही हैं, उन्हें हॉस्पिटल जाना होगा, ऑपरेशन होगा, दो स्टिचेज लगेंगे (हंसती हैं), लेकिन वे ठीक हो जाएंगी और सब पहले जैसा हो जाएगा। मैंने एक मिनट के लिए भी दुखियारी जैसा महसूस नहीं किया और मैं सबसे यही कहना चाहूंगी कि हमें विक्टिम जैसा नहीं महसूस करना चाहिए। अपनी जिंदगी के ड्रामे के हीरो हम खुद हैं। हमें यह नहीं बोलना चाहिए कि ये मेरे साथ ही क्यों हुआ। जब आपके साथ इतनी अच्छी-अच्छी चीजें हुईं, तो कभी बोला कि मेरे साथ क्यों हुआ, नहीं न! तो यह भी ठीक है। एक मुश्किल आई है, उससे लड़ो और जीतो।

हमारे यहां एक दिक्कत यह भी है कि ज्यादातर औरतें घर, परिवार, जॉब, पति, बच्चे, इन सब जिम्मेदारियों में अपने शौक और अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। क्या कहना चाहेंगी? आपके साथ भी ऐसा रहा?
हां, हां, मैं तो बहुत ही अजीब इंसान थी। मैं बहुत ही कॉम्प्लेक्स्ड थी। मुझमें इतनी इनसिक्यॉरिटीज थी कि मुझे भी सुंदर दिखना है, पतला होना है, खास तौर पर अगर आपका पति फिल्म इंडस्ट्री में है। जब आयुष्मान विकी डोनर कर रहे थे, यामी गौतम के साथ, जो बहुत सुंदर हैं और मुझे बहुत प्यारी लगती हैं, उस वक्त मैं प्रेग्नेंट थी, मेरा नौवां महीना चल रहा था और मुझे लगता था कि ये क्या है, मैं क्या हूं और वह क्या कर रहा है। मुझे जल्द से जल्द डिलिवरी के बाद शेप में आना है, पर शेप में भी आने के बाद भी खुशी नहीं मिली। पहले मैं अपने बच्चों को, पति को लेकर ऑब्सेस्ड थी। आयुष्मान को काम पर जाना है तो मुझे उससे पहले पहुंचना चाहिए। बच्चों का स्कूल है, तो मुझे यह करना है, लेकिन इन सबमें मैं कहां हूं, इसलिए खुद को इम्पॉर्टेंस देना भी जरूरी है। मुझे लगता है कि हम अपनी बाकी चीजों को इतनी ज्यादा प्राथमिकता दे देते हैं कि हमारा खुद से प्यार और खुद की परवाह करना पीछे छूट जाता है। मैंने अब जिंदगी जीना शुरू किया है, अब मैं हर चीज इंजॉय करती हूं।

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