रेलवे के पास इतनी बिजली कहां से आती है, कि वह कभी नहीं कटती how railway get too electricity that it never got cut off

रेलवे के पास इतनी बिजली कहां से आती है, कि वह कभी नहीं कटती how railway get too electricity that it never got cut off

रेलवे के पास इतनी बिजली कहां से आती है, कि वह कभी नहीं कटती how railway get too electricity that it never got cut off

दोस्तों आपके मन में कइ बार सवाल आया होगा कि रेलवे के पास इतनी बिजली कहां से आती है कि वह कभी भी नहीं कटती है। रेलगाड़ी चलने के लिए बिजली की जरूरत होती है। जो वोवर रीटेक्सन वायर के द्वारा दिया जाता है। जिसमें सिंगल फेस 25 के बी सप्लाई होती है। इस इलेक्ट्रिक की सप्लाई रेलवे ट्रैक के किनारे 40 से 60 मीटर की दूरी पर स्थित पोल के सहारे भेजा जाता है।

राज्य सरकार इलेक्ट्रिसिटी स्थापित पाॅवर प्लान्ट से लेती है। जिसे ग्रीड की सहायता से रेलवे ट्रैक तक पहुंचाता है। जितने भी पाॅवर प्लान्ट होते हैं। चाहे वो थाॅरमल पाॅवर प्लान्ट या हिइडो पाॅवर प्लान्ट हो वहां पर 24 घंटों तक बिजली भेजी जाती है।

दोस्तों आपको यहां एक सवाल हो सकता है।प्लान्ट से 22 के बी सप्लाई को डायरेक्ट ग्रीड में पोस्ट क्यो नही करता जाता है।

इसे 400 के बी कंभर्ट करने की जरूरत कार्यों पड़ती है। इसका जवाब है कि प्लान्ट से 22 के बी सप्लाई होती है।

उसका करंट इतना ज्यादा होता है, कि उसे पतले वायर में भेजा जाए तो वह हीट होकर गल जाएगा । इसलिए बोल्टेज को बड़ा दिया जाता है। जिससे करंट कम हो जाता है और इसे पतले वायर में भी भेजा जा सकता है।

ग्रिड को इस सप्लाई को सब इस टेस्ट में स्टेप बाउन टार्नस फॉर्मर में 400 के बी को 132 के बी में कंनर्सट किया जाता है। रेलवे इसी 132 के बी सप्लाई को अपने सब इसटेसन तक लाती है । और स्टेप बाउन टार्नस फाॅरमर की मदद से 25 के बी की सिंगल वायर में भेजा जाता है। अगर एक प्लान्ट किसी कारण बंद हो जाती है तो दुसरे प्लान्ट से जनरेट से भेजा जाता है।

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