How A Manufacturing Company Management System Works In Hindi

How A Manufacturing Company Management System Works In Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम इस आर्टिकल के जरिये जानेंगे How A Indian Manufacturing Company Management System Works In Hindi,

 

कैसे एक भारतीय विनिर्माण कंपनी प्रबंधन प्रणाली काम करती है इससे हम हिंदी में जानेंगे ,

 

आपको जानकारी के लिए बता दूँ,

 

मैंने जब कंपनी में ज्वाइन हुआ था उस वक़्त से लेके अवि तक मैंने गूगल पे चेक किया के

 

कैसे एक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी काम करती है, उसके प्रोसेस क्या है,

 

तब मुझे उतना ख़ास जानकारी नहीं मिला था, 

 

लेकिन मेरे कर्रिएर के  में जितना सीखा हूँ जितना देखा हूँ, उसीको आपसे मई शेयर करने वाला हूँ,

 

आपको जानकारी के लिए पहले बता दूँ,

 

हो सके आप जिस वि कंपनी में अगर वह मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है,

 

थोड़ीसी मैनेजमेंट प्रोसेस इत्यादि अलग हो,

 

लेकिन इतना आपको बता दूँ, के ज्यादा फर्क नहीं मिलेगा मैनेजमेंट सिस्टम और अन्य फील्ड में,

 

 

सबसे पहले आता है कोई वि कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में PURCHASE OF RAW MATERIAL (कच्चे माल की खरीद) :

 

जैसे एक्साम्प्ले है मई बनता हूँ, CORRUGATED BOXES, ऐसे में इसमें काच्या सामान लगता है,

 

जैसे की इसके CORRUGATED ROLLS जो की

 

इसके मुखय उपादान है, ऐसे में इसके साथ और काच्या सामान लगता है जैसे GUMS,

 

इसके पैकिंग के लिए एक तरह के रोप्स इत्यादि,

 

इससे खरीदने के लिए कंपनी को रिलीज़ करना होता है परचेस आर्डर जिसमे मेंशन करना होता है कुछ तथ्य जैसे :

 

१ – परचेस आर्डर के नंबर,

२- अगर आप भारत से बिलोंग करते है तो मेंशन करना होगा GST number,

३ – पैमेन्ट टर्म्स,

४ – डिलीवरी टर्म्स इत्यादि,

फिर उस पर्टिकुलर प्रोडक्ट को हम खरीद सकते है, जो उस प्रोडक्ट को बनवाते है,

 

How A Manufacturing Company Management System Works In Hindi

 

दुषरे नंबर पे है इसके प्रोसेसिंग :

 

दोस्तों जैसे हम कचये सामने को बनाते है इसके लिए लगता है मैनपावर या फिर मैचिंग पावर,

 

मई मैनपावर को अलग से समझा दूंगा, इस पॉइंट पे मैंने मशीन्स  के प्रोसेसिंग के बारेमें ही बोल दूंगा आपको,

 

दोस्तों, कोई वि मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में मशीन का इस्तेमाल लगभग १०० प्रतिसद  होते है,

 

जैसे हम कच्चे सामान जो हमने ऊपर में आपको बताये है,

 

उसके प्रोसेसिंग करते है और उसी प्रोसेस को मैन्युफैक्चरिंग सीधे सब्दो में कहा जाता है,

 

और प्रोसेसिंग में  ख्याल रखते है सुपरवाइजर, जिसके अंडर LABOURS जो की मैनपावर के केटेगरी में होते हैं,

 

 

उसके बाद  है इसके डिस्पैच, यानिकि सेल्स जिसमे Accounts टीम इन्वॉल्व होते है उसे हम अलग से मैनेजमेंट में जानेंगे,

 

दोस्तों सेल्स में एकाउंटिंग के काम में इन्वॉइसेस मैनली होते है, जो की एकाउंटिंग पे आता है,

 

लेकिन सेल्स में मटेरियल के लोडिंग से लेकर सेल्स रिसिप्ट पॉइंट मतलब जिन्हे आपको बेचना है,

 

उन तक के पूरी प्रोसेस इस केटेगरी के अंतर्गत होते है,

 

अब  इसके क्वालिटी डिपार्टमेंट के बारेमें जानते है :

 

 

दोस्तों जो प्रोडक्ट बनता है कच्येले सामने के मदत से मशीन के जरिये उसके क्वालिटी जिसे शार्ट करके QC बोलै जाते  है,

 

जिससे ज्यादातर सेल्स पॉइंट मतलब जिन्हे आप आपके प्रोडक्ट बेच रहे है उनको लगता है, ९९.९९ प्रतिसाद कंपनी में ये QC डिपार्टमेंट जरूर होते है,

 

अब चलते है ACCOUNTS के बारेमें जानने के लिए:

 

दोस्तों जो हम स्कूल कॉलेज में परै के दौरान जानते है सीखते है उसके थोड़ी बहुत इसमें काम एते जरूर है,

 

इसके कुछ अलग डिपार्टमेंट होते है :

 

  • सेल्स को  – ऑर्डिनेटर
  • परचेस
  • डाटा एंट्री ऑपरेटर
  • चार्टर्ड अकाउंटेंट
  • मार्केटिंग डिपार्टमेंट (सेल्स)

 

सेल्स को  – ऑर्डिनेटर : एहि डिपार्टमेंट सेल्स के बारेमें साडी तथ्य रखते है, जैसे इनवॉइस बनवाना ,

 

इत्यादि बेचने सम्बंदित, ये डिपार्टमेंट मार्केटिंग डिपार्टमेंट के साथ मिलके ज्यादातर काम करते है,

 

परचेस  : मैंने इसके बारेमें पहले आपको बता चूका हूँ,

 

डाटा एंट्री ऑपरेटर : ज्यादा करके कंप्यूटर रिलेटेड काम जैसे प्रोडक्शन के Quantity के हिसाब इनके द्वारा रखा जाता है,

 

चार्टर्ड अकाउंटेंट  : इनके मदत से एक कंपनी के लाभ और नुकसान के हिसाब रखा जाता है,

 

कभी कभी कंपनी में सिर्फ अकाउंटेंट होते है जो की सैलरी इत्यादि के हिसाब रखते है,

 

मार्केटिंग डिपार्टमेंट (सेल्स) : हर बिज़नेस के एहि एक जरिया है इसे आगे बरने का,

 

सॉलिड  मार्केटिंग डिपार्टमेंट से ही बिज़नेस आगे बार सकता है, इनके मुख्या भूमिका होते है नए कस्टमर ढूंडना,

 

इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट :

 

अगर कोई बिज़नेस में इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट होते है ऐसे में उन सौंपने CHA को हिरे करते है,

 

जो की प्रोडक्ट बिदेश में ले जाना या फिर आने में सहायता करते है,

 

कभी कभी कंपनी में इसके लिए अलग से लोग रखा जाता है,

 

मैनेजर :

 

पूरी कंपनी में सिस्टम्स के प्रधान एहि होते है, इसके बाद उन कंपनी के ओनर होते है,

 

आपको निचे के टेबल से आसान से आपको समझ में आएगा, जहा मैंने आपको बताया कौन कैसे किसको रिपोर्ट करता है,

 

how a company management system works

क्या आपको इसके इलावा वि कुछ और जानकारी है कृपया कमेंट में बता दें,

फ्री में यह से आप गेम खेल सकते है 

 

 

 

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