सिर्फ 4-5 घंटे सोने और ज्यादा व्यायाम करने से आ रहा सडन कार्डियक अरेस्ट – Just for 5 hour sleep & and gym cardiac attacks mostly happen

सिर्फ 4-5 घंटे सोने और ज्यादा व्यायाम करने से आ रहा सडन कार्डियक अरेस्ट – Just for 5 hour sleep & and gym cardiac attacks mostly happen

सिर्फ 4-5 घंटे सोने और ज्यादा व्यायाम करने से आ रहा सडन कार्डियक अरेस्ट – Just for 5 hour sleep & and gym cardiac attacks mostly happen

स्वास्थ्य के प्रति लोगों में बढ़ रही जागरूकता के बीच सडन कार्डियक अरेस्ट जैसी बीमारियों से बढ़ते मौत के मामले भी चिंता जनक हैं। आरएनटी मेडिकल कॉलेज के ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश शर्मा बताते हैं कि सडन कार्डियक अरेस्ट से उदयपुर सहित देश में हर साल लगभग 20 लाख लोग दम तोड़ देते हैं। इनमें 40-65 की उम्र के लोग सबसे ज्यादा शामिल हैं। इसकी वजह लंबे समय तक सिर्फ 4-5 घंटे सोना भी है। नींद के लगातार खराब होने और जरूरत से ज्यादा व्यायाम करने के कारण भी सडन कार्डियक अरेस्ट आ रहा है। मरीजों में अब फिजियोथेरेपी का ट्रैंड तेजी से बढ़ रहा है।

फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. व्योम बोल्या बताते हैं कि लोग कुछ साल पहले तक फिजियोथेरेपी को मालिश, सामान्य व्यायाम और योग समझ कर बच निकलते थे। अब संभाग के 35 हजार से ज्यादा मरीज फिजियोथेरेपी चिकित्सा पद्धति से हर साल स्वस्थ हो रहे हैं। यह आंकड़ा 2009 साल पहले 10 हजार भी नहीं था। हालांकि आदिवासी बहुल क्षेत्र उदयपुर में चिकित्सा सेवाएं आज भी बेदम हैं। हालात यह हैं कि यहां मरीज खाट पर अस्पताल पहुंचते हैं।

अब इन थेरेपी का सहारा लेकर बिना दवा के ही दर्द को तौबा कह रहे मरीज

मैन्युअल थेरेपी : हाथों के प्रयोग से मांसपेशियों और जोड़ों के बिगड़े एलाइनमेंट में सुधार कर दर्द को दूर कर दिया जाता है।

एडवांस इलेक्ट्रो थेरेपी : दर्द से प्रभावित हिस्से पर सेक और वाइब्रेशन के जरिए दर्द से राहत दी जाती है।

ड्राई निडलिंग : एक्यूपंक्चर तकनीक में दर्द से संबंधित ट्रिगर प्वाइंट पर निडिल लगाकर इलाज किया जाता है।

कपिंग पद्धति : दर्द से संबंधित हिस्से पर वेक्यूम पैदाकर अंग में खून का प्रवाह बढ़ाते हैं ताकि दर्द से राहत मिल सके।

मॉडर्न एक्सरसाइज थेरेपी : गलत पॉश्चर या गलत व्यायाम के कारण हुए दर्द को इस थेरेपी से करते हैं। इसमें एलास्टिक बैंड, बॉल्स, रोलर, विशेष प्रकार की कुर्सी आदि का प्रयोग कर किया जाता है।

एडवांस न्यूरो रिहेब : स्ट्रोक, लकवा, पार्किंसन, नसों की कमजोरी, हेड इंज्युरी आदि की रिकवरी की जाती है।

खाट पर अस्पताल पहुंचते हैं मरीज, सड़क पर हो जाते हैं प्रसव

इंडिया हेल्थ रिपोर्ट बताती है कि 1000 लोगों पर भी एक चिकित्सक नहीं है। अस्पतालों में बैड्स कम हैं। प्रति दस में से सात बच्चे एनीमिया पीड़ित हैं। महिलाओं की 36 फीसदी आबादी कुपोषण की शिकार हैं। जिले में कोटड़ा, सराड़ा, फलासिया जैसे गांवों के लोगों को आजादी के 72 साल बाद भी बेहतर चिकित्सक नहीं मिल रही है।

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