बड़ी कंपनियों में सीईअो (CEO) और सीएफअो (CFO) कंपनी में नौकरी शुरू करनेवाले कमर्चारी के मुक़ाबले 200 से 5000 गुना तक ज़्यादा वेतन कमाते हैं. ऐसा क्यों है? क्या वे 200 से 5000 गुना ज़्यादा काम करते हैं?

बड़ी कंपनियों में सीईअो (CEO) और सीएफअो (CFO) कंपनी में नौकरी शुरू करनेवाले कमर्चारी के मुक़ाबले 200 से 5000 गुना तक ज़्यादा वेतन कमाते हैं. ऐसा क्यों है? क्या वे 200 से 5000 गुना ज़्यादा काम करते हैं?

बिलकुल यही सवाल बादशाह अकबर के दरबार में भी उठा था।
बादशाह अकबर बीरबल पर बहुत भरोसा करते थे। यहाँ तक की हर निर्णय लेने से पहले वो बीरबल से राय लेना उचित समझते थे। बीरबल को बादशाह के दरबार में एक बड़ा ओहदा मिला था, और साथ ही उनके लिए ऐशो-आराम के सब इंतेज़ाम भी किये गए थे।
इस बात से बहुत सारे लोग बीरबल से जलते थे, और इसके चलते इस प्रश्न को एक दरबारी ने बादशाह के सामने उठाया।
“बीरबल जी कुछ नहीं करते, बस थोड़ी देर के लिए आते है और दिन भर आराम करते है। फिर भी इतना बड़ा ओहदा रखते है, और इतनी ज्यादा तनख्वाह भी पाते है। और एक हम है, जो दिन भर काम करते है उसके बाद भी हमे इतनी कम तनख्वाह मिलती है। ये तो सरासर अन्याय है।”
इस पर बादशाह अकबर ने कहा- “ठीक है। आज मैं आपको वही काम देता हूँ जो बीरबल जी को देना चाहता हूँ। क्या आप करेंगे?”
दरबारी खुश हो गया और बोला, “बिलकुल करूँगा। आप हुक्म करे।”
अकबर बोले- “पड़ोस के गाँव में बाढ़ आयी हुई है। आप जाइये और देखिये कि वहां पर पानी का स्तर खतरे के निशान के कितने ऊपर है।”
दरबारी मन ही मन खुश हो गया और बोला कि मैं जल्दी से देखकर आता हूँ।
और अकबर ने उसी समय यही काम बीरबल को भी करने को कहा। वो भी चल दिए।
कुछ घंटे बाद ही दरबारी बादशाह के सामने पहुंच गया। और फटाफट बता दिया कि नदी का स्तर कितना है।
थोड़ी देर बाद बीरबल भी पहुंचे और उन्होंने भी जवाब की पुष्टि की।
तब बादशाह ने बोला –
“चलिए अब आप लोग जाकर ये पता करके आये कि कितने लोगों को दूसरी जगह पर स्थानांतरित करने की जरुरत है।”
दरबारी तुरंत पता करने निकल पड़ा, लेकिन बीरबल नहीं गए। दरबारी को लगा कि हो सकता है बीरबल ने हार मान लिया हो। और इस बात से वो बहुत ख़ुश होकर गाँव की ओर चल पड़ा।
कुछ घंटे बाद ही दरबारी जानकारी के साथ आ गया और सब कुछ बादशाह को बता दिया।
फिर बादशाह ने बीरबल की तरफ देखा और पूछा कि क्या बतायी गयी जानकारी सही है। तो बीरबल ने हामी भर दी।
इस पर दरबारी आश्चर्य से बीरबल की ओर देखने लगे।
फिर बादशाह ने कहा –
“अब आप जाकर ये पता करे कि हर परिवार को पर्याप्त मात्रा में राशन मिले, उस हिसाब से कुल कितने राशन की जरुरत पड़ेगी।”
बिना ज्यादा कुछ सोचे और बादशाह का दिल जीतने के उद्देश्य से दरबारी फिर चल चल पड़ा गाँव की ओर।
जल्द ही वो जानकारी के साथ लौटा और सब कुछ बादशाह को बता दिया।
बादशाह ने फिर तथ्यों की पुष्टि के लिए बीरबल की तरफ देखा और बीरबल ने फिर से हामी भर दी।
दरबारी परेशान होकर बादशाह से बोला- “बीरबल तो गाँव बस एक बार गए, फिर उन्हें ये सब जानकारी कहाँ से मिली?”
तब बादशाह बोले,-
“जब बीरबल जी पहली बार गाँव गए होंगे, उन्होंने तभी बाढ़ से सम्बंधित सब जानकारी इकट्ठी कर ली होगी। वो एक बार ही गए लेकिन उन्होंने ना सिर्फ बाढ़ का स्तर देखा बल्कि कितने परिवार प्रभावित है, कितनों को दूसरी जगह पहुंचाना है और कितना राशन और बचाव का सामान चाहिए, ये सब भी पता कर लिया होगा। और मुझे ये भी पता है कि मुझे कहे बिना ही उन्होंने राहत-कार्य भी शुरू करवा दिया होगा।”
फिर बादशाह बीरबल की तरफ देखकर पूछते है कि क्या वो सही बोल रहे है। तो बीरबल फिर से हामी भर देते है।
बादशाह फिर दरबारी से कहते है-
“बीरबल को ये ओहदा और सम्मान उनकी सूझबूझ, उनका दूरदर्शी होना और उनके अनुभव के लिए मिलता है, जो उन्हें और सब से श्रेष्ठ बनाता है।
एक बड़ा ओहदा अपने साथ बड़ी ज़िम्मेदारियाँ भी लाता है ,और बीरबल जी ये बात अच्छी तरह से समझते है।”
कहानी का स्त्रोत: इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस की क्लास के प्रोफेसर द्वारा वर्णित

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